मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

मैं क्या ग़लत करता हूँ

मैं क्या गलत करता हूँ
एक कवि से मांगता हूँ
 उसका इमानदारी से भरा दिल |


एक फुल से चाहता हूँ
उसकी प्यार भरी गंध |



नदी के जल के पास रखता हूँ
मछलियों के संग
तैरने की इच्छा |
मैं क्या गलत करता हूँ
पत्नी के आँखों में ढूंढता हूँ
खोई हुई प्रेम भरी
चिट्ठियों का मजमून |
बच्चों में ढूंढता हूँ
भविष्य के रास्तों की गंध  |
स्वर्ग सिधारे पुरखों से
मांगता हूँ
धरती के चेहरे पे फैली
विवाइयों के लिए माफ़ी |
मैं क्या गलत करता हूँ
जो कविता से मांगता हूँ
अँधेरे में कंदील भर रोशनी
 धूप में पेंड भर छाँव
प्यास में घूँट भर जल |
-सुरेश सेन निशांत

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