यह खतरनाक समय है
यह खतरनाक समय है
जब मोटापा एक आम समस्या है
[जबकि प्रेमचंद ने लिखा है मोटा होना बेहयाई है]
और रोटी पचाने के लिए
पैदल चलना जरूरी है
झूठ बोलना हमारी आदत नहीं मजबूरी है
जहाँ लिखा हो -पेशाब करना मना है
वहीं पेशाब करना जरूरी है
यह खतरनाक समय है ...
जब हत्या कि घटनाओं को
आसानी से आत्म हत्या में तब्दील किया जाता है
और बाप बेटी को भी न छोड़ता हो
आप ही बताओ ऐसे समय में
कैसे जीया जाता है
.....जब ईमादार होना लाचारी है
जिसे अवसर मिला
वही व्यभिचारी है|
..जब सत्य बोलना आग से खेलना है
और सरकारी घास को सब मिल कर चरतें हैं
समर्थ आदमी कानून से खेलतें है
और लाचार को सब मिलकर ठेलते हैं|
..जब दोहरा चरित्र बड़े व्यक्तित्व की निशानी है
जो कुर्सी पर बैठा है
उसका खून खून है
बाकी का पानी है|
..जब पक्षधरता सत्ता हथियाने का आसान तरीका है
बाँदी गाय हमारी मजबूरी है
आप कहतें हो वोट देना जरूरी है|
पक्ष विपक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू है
राजनीति एक नाटक हैजिसमें अधिकतर दलबदलू है|
लोकतंन्त्र बिन पेंदी का लोटा है
कुर्सी पर वहीं काबिज़ है
जिसका चरित्र खोटा है|
यह खतरनाक समय है
जब विश्वास पीछे से वार करता है
आस्था मुंह छिपाने के काम आती है
और अदालतें
सच को झूठ
झूठ को सच बनाती हैं
जो सबसे बड़ा ढोगी है
वही योगी है
यह खतरनाक समय है
जब विकास का चक्र तेजी से चल रहा है
सही अर्थों में आदमी
रोबोट में बदल रहा है .
यह खतरनाक समय है
जब मोटापा एक आम समस्या है
[जबकि प्रेमचंद ने लिखा है मोटा होना बेहयाई है]
और रोटी पचाने के लिए
पैदल चलना जरूरी है
झूठ बोलना हमारी आदत नहीं मजबूरी है
जहाँ लिखा हो -पेशाब करना मना है
वहीं पेशाब करना जरूरी है
यह खतरनाक समय है ...
जब हत्या कि घटनाओं को
आसानी से आत्म हत्या में तब्दील किया जाता है
और बाप बेटी को भी न छोड़ता हो
आप ही बताओ ऐसे समय में
कैसे जीया जाता है
.....जब ईमादार होना लाचारी है
जिसे अवसर मिला
वही व्यभिचारी है|
..जब सत्य बोलना आग से खेलना है
और सरकारी घास को सब मिल कर चरतें हैं
समर्थ आदमी कानून से खेलतें है
और लाचार को सब मिलकर ठेलते हैं|
..जब दोहरा चरित्र बड़े व्यक्तित्व की निशानी है
जो कुर्सी पर बैठा है
उसका खून खून है
बाकी का पानी है|
..जब पक्षधरता सत्ता हथियाने का आसान तरीका है
बाँदी गाय हमारी मजबूरी है
आप कहतें हो वोट देना जरूरी है|
पक्ष विपक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू है
राजनीति एक नाटक हैजिसमें अधिकतर दलबदलू है|
लोकतंन्त्र बिन पेंदी का लोटा है
कुर्सी पर वहीं काबिज़ है
जिसका चरित्र खोटा है|
यह खतरनाक समय है
जब विश्वास पीछे से वार करता है
आस्था मुंह छिपाने के काम आती है
और अदालतें
सच को झूठ
झूठ को सच बनाती हैं
जो सबसे बड़ा ढोगी है
वही योगी है
यह खतरनाक समय है
जब विकास का चक्र तेजी से चल रहा है
सही अर्थों में आदमी
रोबोट में बदल रहा है .
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